क्यों मनातें हैं धनतेरस, जाने इसका महत्व

भारत त्योहारों का देश हमारे देश में हर महीने और हर मौसम में अलग-अलग त्यौहार मनाया जाता है जिसका अपना-अपना महत्व होता है। त्यौहार के दौरान घर के सभी लोग इकठ्ठा होते है, पूजा पाठ करते है और सबसे बड़ी बात ये है की हमारे घरों में अच्छे-अच्छे पकवान बनते है। जिनको सभी लोग मिलकर साथ खाते है, त्यौहार का पूरी तरह से आनंद लेते है| ऐसा ही एक पांच दिवसीय पर्व दीवाली जो कार्तिक के महीने में मनाई जाती है इन पांच दिनों में एक दिन धनतेरस का भी होता है। साल 2019 में 25 अक्टूबर दिन शुक्रवार को मनाया जाएगा धनतेरस।

क्यों मनाते है धनतेरस

भारत में हर महीने का अपना-अपना महत्व है और हर महीने कोई न कोई महत्वपूर्ण घटना जरूर घटित हुई है ऐसे ही कार्तिक माह कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को धन्वंतरि देवता का जन्म हुआ था। इनका जन्म समुन्द्र मंथन से हुआ था। जब इनका जन्म हुआ तो यह अमृत कलश लेकर आए थे। जिसके लिए इतना भव्य समुद्र मंथन किया गया। इसी समुद्र मंथन से माँ लक्ष्मी जी का भी जन्म हुआ था। इसी धन्वंतरि के कारण इसका नाम धनतेरस पड़ा| धन्वंतरि देवो के वैद्य है इस कारण इसे इस दिन को आयुर्वेद दिवस भी कहा जाता है।

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धनतेरस का महत्व

धनतेरस के दिन बर्तन और चांदी को खरीदना शुभ माना जाता है। इस प्रकार धनतेरस के दिन बर्तन ख़रीदने कि प्रथा प्रचलित है। इस दिन लोग नए वस्त्र खरीदते है। इस दिन नए वस्त्र, सिक्का, गहनों, उपहार, बर्तनों की खरीदारी करना भी बहुत शुभ माना जाता है। इस दिन धनवंतरी देव का जन्म हुआ इस लिए इनकी पूजा कि जाती है। इस दिन माँ लक्ष्मी कि भी पूजा कि जाती है और इसी दिन मुर्त्यु के देवता यमराज कि भी पूजा की जाती है। पूजा करते समय सात अनाज की भी पूजा की जाती है। सात अनाज में गेहू, उडद, मुंग, चना, चावल, जो, मसूर आदि। इनकी पूजा के साथ-साथ पूजन समग्री में विशेष रूप से स्वर्णपुष्पा के पुष्प से भगवती का पूजन करना शुभ माना जाता है।

धनतेरस पूजा की विधि

● सबसे पहले मिट्टी का हाथी और धन्वंतरि भगवानजी का चित्र स्थापित करें
● शुद्ध चांदी या तांबे की आचमनी से जल का आचमन करें
● श्रीगणेश का ध्यान व पूजन करें
● हाथ में अक्षत-पुष्प लेकर भगवान धन्वंतरि का ध्यान करें। हाथ में अक्षत-पुष्प लेकर भगवान धन्वंतरि का ध्यान करें
● पुष्प अर्पित कर दें और जल का आचमन करें
● भगवान धन्वंतरि के चित्र को जल के छींटों से स्नान कराएं
● रोली या लाल चंदन से तिलक करें