संत समाज भारतीय संस्कृति के जड़ों में विद्यमान है-संयुक्ता भाटिया

image suorce-google

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के शंकुतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय में राष्ट्र धर्म विजय यात्रा संत एवं पदयात्री सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस समारोह के दौरान मुख्या अतिथि स्वामी नर्मदानंद महाराज जी उपस्थित रहे। जो गंगोत्री से प्रारंभ कर पैदल द्वादस ज्योतिर्लिंग की यात्रा करते हुए पर्यावरण संरक्षण और जल संचयन के साथ ही गौ संगरक्षण का संदेश पूरे समाज को दे रहे है। आपको बता दे की स्वामी जी 15 सदस्यीय संतो की टोली संग 11 हज़ार किलोमीटर की यात्रा पैदल करेंगे।

पृथ्वी पर मात्र 3 प्रतिशत पानी पीने योग्य

इस समारोह के अवसर पर कार्यक्रम की मुख्य अतिथि महापौर संयुक्ता भाटिया और विशिष्ट अतिथि दत्तात्रेय होसबोले जी ने उनको पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया। सूत्रों के अनुसार मंडलायुक्त मुकेश मेश्राम ने कहा कि प्रधानमंत्री ने जलशक्ति मंत्रालय को प्रारम्भ कर भारत के लोगों को जल को बचाने के लिए प्रेरित करने का काम किया है। पुराने लोगो मे पानी को चरित्र से जोड़ा जाता है। इसलिए संभ्रांत लोगो को पानीदार कहकर संबोधित किया जाता है। उन्होंने आगे कहा कि मात्र 3 प्रतिशत पानी ही पीने योग्य है और हम उसको भी हम प्रदूषित करते जा रहे है। जल ही जीवन है हमें इसको बचाना है।

पुरानतन संस्कृति अभी तक जीवत है

महापौर संयुक्ता भाटिया ने सभा को संबोधित करते हुए कहा की संत समाज की तपस्या के कारण ही भारतीय पुरानतन संस्कृति अभी तक जीवत है। जैसा की हम सब जानते है की दुनिया की कई पुरानी सभ्यताएं इतिहास बनकर रह गयी है। परंतु संत समाज जो कि वट वृक्ष रूपी भारतीय संस्कृति के जड़ों में विद्यमान है। यह जड़े इतनी मजबूत है कि भारतीय संस्कृति रूपी वट वृक्ष को भारी अंधी और तूफानों में भी जीवित किये हुए है।

प्रदूषण को बचने के लिए वृक्ष लगाए-महापौर

संयुक्ता भाटिया ने बताया की हम लखनऊ शहर में पर्यावरण को संरक्षित करने के उद्देश्य से भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी को समर्पित करते अटल उदय वन का निर्माण कर रहे है। इसके अतिरिक्त हम विभिन्न स्कूलों में बच्चों को जागरूक करने के उद्देश्य से पौधा वितरण और पौधा रोपण कार्यक्रम भी समय समय पर कर रहे है। जिसमे लगभग 5000 पौधे लगाए है।

प्रतियोगिता के अवसर पर महापौर संयुक्ता भाटिया ने प्रतिस्पर्धा का सही महत्व समझाया

गाय के 80प्रतिशत तत्व मनुष्य से मिलते है

इस समारोह के दौरान नर्मदानंद महाराज ने कहा कि संत के मार्गदर्शन का अनुसरण समाज करता है। ऐसी परंपरा भारत की रही है। हम प्रकृति से अपने जीवन भर में बहुत कुछ लेते है। परंतु प्रकृति को मल-मूत्र के अलावा और कुछ नही देते है। उन्होंने आगे कहा कि गाय के 80प्रतिशत तत्व मनुष्य से मिलते है, अगर हम गाय को एक बार भोजन कराएं तो वह रोज हमारे घर आएगी।

इस मौके पर महापौर संयुक्ता भाटियाके साथ नर्मदानंद महाराज , राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दत्तात्रेय होसबोले ,लखनऊ के मंडलायुक्त मुकेश मेश्राम, विश्वविद्यालय के कुलपति राधाकृष्ण पाल सिंह, समाजसेवी अजय सिंह, प्रान्त प्रचारक कौशल, सह प्रान्त कार्यवाह प्रशांत भाटिया, योगी गोवर्धन सहित अन्य जन उपस्थित रहें।