लखनऊ नगर निगम के पास नही है 200 करोड़ का हिसाब, महापौर ने मांगा हिसाब

नगर निगम लखनऊ के पास नही है 200 करोड़ का हिसाब। हिसाब मांगने पर नही दे पाए जिम्मेदार 200 करोड़ के खर्च का ब्यौरा। महापौर संयुक्ता भाटिया ने मांगा 200 करोड़ का हिसाब।

खर्च का हिसाब न मिलने पर महापौर ने किया लेखा विभाग का औचक निरीक्षण महापौर परिषद के अध्यक्ष नवीन जैन व महामंत्री ऋषिकेष उपाध्याय ने कहा कि भाजपा के घोषणा पत्र में 74वां संशोधन लागू कराने की बात है, इसलिए इसे तत्काल लागू कराया जाए। अमृत योजना के तहत जहां पेयजल लाइन नहीं पहुंचीं हैं, वहां यह काम किया जाए। नगर निगमों को राज्य वित्त आयोग से मिलने वाली धनराशि में कटौती न की जाए। शहर में नए नाले निर्माण के लिए नगर निगम को 50 लाख रुपये तक का अधिकार है। इसे बढ़ाकर एक करोड़ रुपये किया जाए। महापौर संयुक्ता भाटिया ने मांगा 200 करोड़ का हिसाब।

पुरवामीर के ग्रामीणो ने किया एलिवेटेड ब्रिज की मांग

बता दे की इससे पहले जुलाई में हुई बैठक में नगर निगम को महापौर संयुक्ता भाटिया ने कहा था कि उन्हें पहले की तरह नगरीय निकायों के अधिकारियों व कर्मचारियों के पटल परिवर्तन व चरित्र पंजिका लिखने के अधिकार दिए जाएं।फाइलों व रजिस्टरो की जांच रिकार्ड नही मिले। परिषद ने नगर विकास मंत्री सुरेश कुमार खन्ना को 14 सूत्री पत्र भी सौंपा था ।

महापौर ने 18 बिंदुओं पर मांगी है वित्त अधिकारी से रिपोर्ट ऑडिट रिपोर्ट,फार्मवार ठेकेदारों की देनदारी,पीएफ,ईपीएफ भुगतान,जीएसटी आयकर कटौती,विकास कार्यो के भुगतान की रिपोर्ट,सभी मदो में किये गए भुगतान का बिल,वेतन,पेंशन भुगतान,सभी खातों के बैंक स्टेटमेंट, मांगी है महापौर ने रिपोर्ट।