उन्नाव में इंडस्ट्रियल टाउनशिप के लिए ट्रांस गंगा योजना बनी थी-सतीश महाना

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उन्नाव मामले पर आज सतीश महाना ने प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि सन 2014-15 मई उन्नाव में एक इंडस्ट्रियल टाउनशिप डेवलपमेंट करने के लिए तत्कालीन सपा सरकार ने योजना बनाई थी। जिसका ट्रांस गंगा उसको नाम दिया गया और 2002 से उसे कॉलोनी बना दी गई थी 2003 से इसको एक्विजिशन के लिए प्रक्रिया प्रारंभ की गई थी। 2014 15 में तत्कालीन सपा सरकार ने पूरे प्रदेश में एक ट्रांस बंदा नाम के टाउनशिप को डिवेलप करने का एक दिव्य स्वप्न उत्तर प्रदेश की जनता को दिखाया था विशेषकर कानपुर उन्नाव की जनता को दिखाया था। जिसमें उन्होंने कहा था कि यहां बड़ी बड़ी बिल्डिंग होंगी जिसका उद्घाटन भी तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने किया था।

उन्होंने बताया की उसका बकायदा प्रोमो भी जारी किया गया था। कॉलोनी को डेवलप करके रेजिडेंशियल प्लॉट भी काटे गए थे। जिसमें 2065 प्लॉट रेजिडेंशियल थे इतना बेहतरीन प्रोजेक्ट था। जिसमें बैराज के पास का इलाका था। तथा 17 86 लोगों ने उसमें पैसा जमा कराया है उसे लेने के इच्छुक रहे लेकिन उसमें जो किसानों का मामला था। जो प्रारंभिक मुआवजा 151003 रुपए प्रति वर्ग मीटर 2010 में जो से 5 लाख 51 हजार तय किया गया। इसके बाद सरकार आई अब तक 237 करोड रुपए की धनराशि वितरित की जा चुकी है। फिर भी उस समय कार्य नहीं प्रारंभ शुरू हो सका।

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उन्होंने बताया की कई ऐसे ठेकेदार थे उसमें जिन्हें टेंडर दे दिए गए थे पर उनकी क्षमता भी नहीं थी कार्य करने की थोड़ा बहुत काम शुरू हुआ तो किसानों ने उसे रोक दिया। इसके लिए कुल 1144 एकड़ जमीन अधिग्रहित की गई थी। इसमें सबसे महत्वपूर्ण बात यह है किसानों से बातचीत होती रही। किसानों से जो जमीन खरीदी गई थी। उनको जो मुआवजा दिया गया था। उसके अलावा 6% उसको कमर्शियल लैंड देने का भी वायदा किया गया था। वहां के किसानों का हित है कि उस जगह को डेवलप किया जाए। इस वजह से वहां व्यापारिक सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति बेहतर होगी। लोगों की जिलों के जमीने वहां पर नहीं है। उस प्रकार के लोग भी जो राजनीतिक रूप से विवाद पैदा करना चाहते हैं।

उन्होंने बताया की जिन पर मुकदमा किया गया था। उनमें से केवल एक व्यक्ति ही ऐसा है जो अपना मुआवजा ले चुका है। बाकी 13 अन्य लोग नाउन की वहां जमीनें हैं ना वहां किसी प्रकार से हिस्सेदार हैं सरकार की मंशा किसानों के ऊपर किसी प्रकार की जोर जबरदस्ती कर करने की नहीं है। पिछली सरकार ने उन 1786 लोगों के पैसे वापस करने पर 25% धनराशि काटकर उन्हें पैसा दिया जो कि सरकार उन्हें वह जमीन नहीं दे पाई पर हमारी सरकार ने 6% ब्याज के साथ उन लोगों का पैसा वापस करेंगे जो जमीन नहीं लेना चाहते लगभग 780 लोगों ने पैसा वापस करने की मांग की है। उन्होंने बताया की 2 बड़े बिल्डरों पर भी एफआईआर दर्ज हो चुकी है। पिछले 2 दिनों से ट्रांस गंगा सिटी पर काम चल रहा।