शिवपाल का छलका दर्द, बोले-अखिलेश को नेता और मुख्यमंत्री माना।

समाजवादी पार्टी से अलग होने के बाद शिवपाल यादव का दर्द कई बार छलकते दिखा है। कभी नेता जी को लेकर तो कभी अखिलेश यादव को लेकर, कुछ ऐसा ही मामला आज फिर एक बार सामने आया है। मुलायम सिंह के भाई और अखिलेश के चाचा शिवपाल यादव का दर्द एक बार फिर छलक आया। शिवपाल यादव सोमवार को एक निजी कार्यक्रम में शामिल होने के लिए मैनपुरी पहुंचे। शिवपाल यादव ने अखिलेश का नाम लिए बगैर कहा कि हमने उन्हें नेता माना, सीएम माना लेकिन कुछ साजिशकर्ता सफल हो गए जिसका खामियाजा हमारी समाजवादी पार्टी को उठाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि उनके मन में अभी भी पूरी गुंजाइश बची है।

प्रसपा के संस्थापक एवम राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल ने आगे कहा कि नेताजी के साथ बैठ जाएं तो तीसरे किसी की जरूरत नहीं होगी। उन्होंने सपा के वरिष्ठ नेता एवम नेता विरोधी दल रामगोविंद पर हमला बोलते हुए कहा कि उनकी कोई हैसियत नहीं है और वह बीमार हैं। कहीं न कहीं अब शिवपाल के निशाने पर वो सब है जिन्होंने मध्यस्थता न कराकर उन्हें अलग करने का काम किया था।

अखिलेश यादव प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बोले शिवपाल यादव का घर में स्वागत है

वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव से ठीक पहले यादव परिवार और समाजवादी पार्टी में मचे घमासान के बाद अखिलेश और शिवपाल के बीच सुलह की तमाम कोशिशें नाकाम रहीं। लेकिन उसके बाद पहली बार यह संकेत मिले थे कि दोनों के बीच करीब तीन साल से चल रही तनातनी सुलझ सकती है, पर ऐसा हुआ ही नही। इसकी शुरुआत प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया के अध्यक्ष शिवपाल सिंह ने ही की थी। कुछ दिनों पहले शिवपाल ने मैनपुरी में कहा था कि उनकी तरफ से सुलह की पूरी गुंजाइश है। इसके बाद अखिलेश यादव ने लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि शिवपाल का घर में स्वागत है। अगर वे आते हैं तो उन्हें पार्टी में आंख बंद कर शामिल करूंगा।

शिवपाल यादव ने बोला सरकार पर जुबानी हमला

समाजवादी पार्टी के परिवार में दरार 2016 में शुरू हुई थी

विधानसभा चुनाव से पहले वर्ष 2016 में यादव परिवार में महाभारत और कलह की शुरुआत हुई थी। बात इतनी बढ़ गई थी की अखिलेश यादव ने समाजवादी पार्टी पर एकाधिकार कर लिया और राष्ट्रीय कार्यकारिणी में सर्वसम्मति से उनको राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया। उसके बाद चुनाव में समाजवादी पार्टी की हार के बाद शिवपाल ने बयानबाजी शुरू कर दी थी। जिसके बाद शिवपाल ने समाजवादी मोर्चे का गठन किया और फिर प्रगतिशील समाजवादी पार्टी बना ली। इस बीच अखिलेश और शिवपाल के बीच सुलह की कई कोशिशें हुईं, लेकिन सभी नाकाम साबित हुईं। अब सपा और प्रसपा के दोनों अलग अलग रास्ट्रीय अध्यक्ष बन गए ।