शहीद की बेटी ने कहा, नही पैदा होने देगी दूसरा विकास दुबे….

Vikas Dubey
Kanpur

कानपुर:। यूपी के सबसे बड़े काण्ड पर उठ रहे सवालों और जांच को लेकर बोली दिवंगत सीओ की बेटी और कहा ”नही पैदा होने देगी दूसरा विकास दुबे, जो अब इस दुनिया मे नही है।” लेकिन उसकी दहशत अभी भी लोगों की जुबानी सुनी जा रही है, जिसकी बात करते ही सिर्फ बिकरु गाँव ही नही बल्कि राजनीति अखाड़े से लेकर बिजनेसमैन तक खौफ खा जाते थे और जब अंत समय आया तो यूपी की खाकी भी विकास दुबे के आगे कमजोर सी पड़ गयी, क्योंकि विकास दुबे ने एक साथ आठ पुलिस वालों को मौत के घाट उतार दिया। जिसमे चली ताबड़तोड़ गोलियों की गूंज अभी भी खामोशी तक पहुंचा देती है।

क्या है विकास दुबे का आपराधिक इतिहास ?

विकास दुबे जिसने अपनी मौत से पहले साफ कहा था एक दिन राजनीति का रूप बदल जायेगा यानी विकास दुबे यह चाहता था कि उसका सिक्का बदमाशी में तो उछल चुका है पर अब राजनीति की तरफ मुड़ने वाला है। तभी विकास द्वारा सन 2006 में दिए गए एक इंटरव्यू के दौरान कुछ इसी तरह बयां किया गया था। लेकिन 2 बजे 3 जुलाई 2020 की गुरुवार रात जब विकास दुबे ने 2001 श्रमराज्य मंत्री संतोष शुक्ला हत्याकांड के बाद फिर से दहशत कायम कर दी थी।

लेकिन इस बार विकास दुबे के टारगेट में राजनेता नही था बल्कि उत्तर प्रदेश की वह खाकी थी जिसके खौफ से उत्तर प्रदेश का अपराध कम हो जाता था। उस खाकी के एक सीओ दो एसओ समेत चार सिपाहियों को मौत के घाट उतार दिया था,,, जिसकी दहशत कुछ इस तरह थी।

तभी डॉन की कुर्सी में बैठे विकास दुबे और उसके साथियों ने 2 बजे तीन जुलाई की रात दबिश पर आये बिल्हौर कोतवाली के सीओ देवेंद्र मिश्रा समेत आठ पुलिस वालों को मौत के घाट उतार दिया। जिसको सुनते और देखते ही पूरा यूपी का शासनिक और प्रशासनिक तंत्र डिस्टर्ब हो गया। आनन फानन में यूपी के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने विकास खात्मे का एलान कर दिया। जिसकी पहली सफलता में आईजी कानपुर जोन मोहित अग्रवाल की अगुवाई में विकास के सबसे करीबी मामा और भतीजे को मार गिराया गया तो दूसरी कड़ी में दो साथियों को मुठभेड़ के दौरान गिरफ्तार किया गया।  वारदात के 9 दिन बाद दो और साथियों को फिर से मार गिराया गया तो विकास दुबे ने मध्य प्रदेश के उज्जैन में महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन करने के बाद अपने आपको सरेंडर कर दिया था। जिसे एमपी पुलिस भले ही गिरफ्तारी बता रही हो पर विकास ने यह साबित कर दिया था, मैं ही हूँ विकास दुबे कानपुर वाला।

तभी दसवें दिन विकास के खात्मे की कसम खा चुकी यूपी पुलिस ने उस वक्त विकास दुबे को मार गिराया। जब विकास दुबे को एमपी से यूपी की सरहद में लाया जा रहा था,जिसके दौरान कानपुर की धरती पर आते ही भौंती के पास पुलिस की वही गाड़ी दुर्घटना ग्रस्त हो गयी जिसमे विकास दुबे बैठा था। पुलिस के मुताबिक विकास ने पिस्टल छीनकर भागने की कोशिश की तो पुलिस ने भी गोली का जवाब गोली से दिया और कुछ ही समय मे विकास का खात्मा हो गया। जो अब सवालों के घेरे में हैं। पर खुशी जाहिर की तो उन जवानों के परिवारों ने जिनके मुखिया का हाथ विकास दुबे ने मौत में बदल दिया था।

जिसका जिक्र करें तो शहीद हुए सीओ देवेंद्र मिश्रा की बेटी वैष्णवी ने यह कसम खा ली है कि वह भी अपने शहीद पिता की तरह यूपी पुलिस में काम करेगी और किसी भी अपराधी के अंदर विकास दुबे का रूप नही पैदा होने देगी।

हालांकि जांच में कुछ भी सवाल उठाएं जाए लेकिन विकास दुबे का खात्मा करने वाली यूपी पुलिस अपनी खामोशी के बीच खुशी जाहिर करने में लगी है कि उसने अपने साथियों के खून का बदला ले लिया है।

रिपोर्ट:-दिवाकर श्रीवास्तवा…

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