लक्ष्मी विलास बैंक का इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस में विलय की मांग ख़ारिज

आरबीआई ने 9 अक्टूबर बुधवार को लक्ष्मी विलास बैंक और इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस के विलय की मांग को ख़ारिज कर दिया है। इस कदम से आरबीआई ने देश में किसी गैर बैंक का किसी बैंक के साथ विलय की पहली कोशिश को नाकाम कर दिया।

क्यों ख़ारिज की RBI ने ये मांग

RBI ने 9 अक्टूबर 2019 को घोषणा की है कि लक्ष्मी विलास बैंक को इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस ली। और इंडियाबुल्स कमर्शियल क्रेडिट लि। के साथ विलय के आवेदन की मंजूरी नहीं दी जा सकती। इस बैंक ने 7 मई 2019 को विलय के लिए RBI से मंजूरी मांगी थी। अप्रैल के महीने में सभी स्टॉक के विलय होने की घोषणा के बाद से इंडियाबुल्स हाउसिंग के शेयरों में 73.45 फीसदी और लक्ष्मी विलास बैंक के शेयरों में 71 फीसदी की गिरावट देखने को प्राप्त हुई। आपको बता दें की लक्ष्मी विलास बैंक का हेड ऑफिस चेन्नई में स्थित है।

पिछले महीने लक्ष्मी विलास बैंक पर RBI ने सख्त कार्रवाई करते हुए बैंक को PCA फ्रेमवर्क में डाल दिया। RBI ने बैंक की 790 करोड़ रुपये की हेराफेरी बाद यह फैसला लिया है। लक्ष्मी विलास बैंक में NPA बढ़ने, अपर्याप्त पूंजी, लगातार दो साल तक एसेट्स पर निगेटिव रिटर्न को देखकर RBI ने बैंक को PCA की लिस्ट में डाल दिया। PCA के तहत लक्ष्मी विलास बैंक को कर्ज देने, नई ब्रांच खोलने और डिविडेंड का भुगतान करने पर रोक लगा दी गयी है। इसके साथ बैंक को चुनिंदा क्षेत्रों को दिए कर्ज में कमी लाने पर भी काम करना पड़ेगा। 31 मार्च साल की समाप्ती पर बैंक का NPA 7.49 फीसदी, पूंजी पर्याप्तता अनुपात 7.72 फीसदी और परिसंपत्तियों पर इसका रिटर्न (RoA)-2।32 फीसदी था।

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देश के निजी बड़े बैंकों में से एक लक्ष्मी विलास बैंक के डायरेक्टर्स के खिलाफ दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने 790 करोड़ रुपये गबन के आरोप में केस दर्ज किया गया है। इस केस को पुलिस ने फाइनेंशियल सर्विस कंपनी रेलिगेयर फिनवेस्ट की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए दर्ज किया है।

इंडियाबुल्स भी है मुश्किलों में

लक्ष्‍मी विलास बैंक के साथ इंडियाबुल्स को भी कई मुश्किलो का सामना करना पड़ रहा है। इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड भी फंड के हेराफेरी मामले की वजह से विवादों में है। हाल ही में एनजीओ सिटीजंस विस्सल ब्लोअर फोरम ने दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका लगाकर इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड पर कई बड़े आरोप लगाए हैं।
आरोपों में बताया गया है कि इंडियाबुल्‍स हाउसिंग ने अपने प्रवर्तकों और ग्रुप की विभिन्न कंपनियों के माध्यम से बड़ी कॉरपोरेट समूह के स्वामित्व वाली कंपनियों को संदिग्ध कर्ज दिया। बता दें कि 80 हजार करोड़ से अधिक के कर्ज में डूबी इंडियाबुल्स समूह रियल एस्टेट, शेयर बाजार, बैंकिंग और हाउसिंग लोन के कारोबार में सक्रिय है।