पुलिसकर्मियों का टूटता मनोबल

अवसाद ग्रस्त आत्महत्या करते पुलिसकर्मी, अपमान सहते पुलिसकर्मी, बिनावजह सजा पाते पुलिसकर्मी ! ये सब ऐसे कारण है जिसके चलते पुलिसकर्मियों का मनोबल टूट रहा है! पुलिसकर्मियों का जो सबसे बड़ा दुर्भाग्य है वो ये कि न तो पुलिसकर्मी जनता से सम्मान पा रहे हैं और न ही अपने अधिकारियों से! पुलिसकर्मियों की अजब स्थिति है! पुलिसकर्मी न घर का है न घाट का ! पुलिसकर्मियों का मनोबल टूटने का कारण क्या है? पहला कारण तो यह है कि किसी भी पुलिसकर्मी से जिस स्थिति में ड्यूटी करवाई जाती है! वो स्थिति बिल्कुल अमानवीय होती है! एक तरफ सफेदपोश अपराधियों के गुर्गों पर रहम दिखाया जाता है! दूसरी तरफ पुलिसकर्मियों से कहा जाता है कि अपराध नियंत्रण करो !

अगर पुलिसकर्मियों को अपराध नियंत्रण के लिये छूट मिले तो यकीन जानिये अपराधियों में त्राहि- त्राहि मच जायेगी !पुलिसकर्मियों का मनोबल तब टूटता है जब वे मेहनत करके कोई गुडवर्क करते हैं और उसमें नेतागीरी हो जाती है! पुलिसकर्मियों का मनोबल तब भी टूटता जब उनके कार्य में अनावश्यक हस्तक्षेप होता है! ये हस्तक्षेप मीडिया, रसूखदार नेता किसी के भी द्वारा हो सकता है!

योगीराज में ट्रैफिक पुलिसकर्मी कर रहे दिनदहाड़े अपनी मनमानी

पुलिसकर्मियों की सबसे ज्यादा चर्चा होती है अभद्र व्यवहार की ! पुलिसकर्मियों द्वारा अभद्र व्यवहार की चर्चा सब करते हैं ! पर इसका कारण कोई नहीं जानना चाहता ! जब किसी व्यक्ति से शक्ति से ज्यादा कार्य लिया जायेगा तो वह उल्टा सीधा व्यवहार करेगा ही !एक पुलिसकर्मी 17 से 18 घंटे की ड्यूटी करके इतना थक जाता है कि उसको अपनी वाणी पर नियंत्रण रखना बहुत कठिन होता है! पुलिसकर्मियों को साप्ताहिक अवकाश देने की बात बहुत दिनो से चल रही है,परन्तु सरकार की ओर से अभी तक कोई सार्थक निर्णय नहीं हुआ है! जन सुरक्षा से जुड़े एक महत्वपूर्ण विभाग के लिये उ०प्र० सरकार की ये शिथिलता आश्चर्यजनक है!

सरकार को पुलिस विभाग, तथा पुलिसकर्मियों की समस्याओं के विषय में त्वरित निर्णय लेना चाहिए। पुलिसकर्मियों का टूटता मनोबल एक चिंताजनक विषय  है ! इसका कारण जानकर,उ०प्र० सरकार तथा पुलिस विभाग के उच्चाधिकारियों को त्वरित निर्णय लेना चाहिये!

                                                                             पत्रकार- “शमशाद खान” “आवाज-ए-उत्तर प्रदेश”