डिग्रियों के भी खुले बाजार, जाने क्या है वजह

आये दिन भारत देश में शिक्षा का व्ययसायीकरण होता जा रहा है। भारत जैसे विशाल देश में यह प्रक्रिया देश के भविष्य के लिए बहुत ही खतरनाक है। लोग शिक्षा के नाम पर बहुत सारी संस्थाएं, कोचिंग सेंटर, प्राइवेट स्कूल और प्राइवेट कालेज खोल रहे। लेकिन इन सभी जगहों पर शिक्षा को कम महत्व और पैसे को ज्यादा महत्व दिया जाता है। प्राइवेट स्कूलों और कोचिंगों में बच्चों की पढाई पर कम और शिक्षा शुल्क वसूलने पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। बच्चा पढ़ रहा है या नहीं पढ़ रहा है इससे उनका कोई मतलब नहीं है सिर्फ उनको फीस से मतलब रहता है। यह प्रक्रिया भारत के उत्तर प्रदेश में विशेष कर बढ़ती जा रही है। सोचने की बात यह है की लोगों को घर बैठे मुँह माँगा पैसे लेकर डिग्रियां दी जा रही है।

अगर हम बात करे उत्तर प्रदेश की शिक्षा संस्थानों की तो हर शहरों के बड़े चौराहों पर आपको शिक्षा संस्थान जरूर मिलेंगे और एक नहीं कई सारी संस्थाएं मिलेंगी। लेकिन अगर हम बात करे उत्तर प्रदेश में रोजगारी की तो भारत के जिस राज्य में सबसे ज्यादा शिक्षा संस्थान है उसी राज्य में सबसे ज्यादा बेरोजगारी है। इससे साफ़ पता चलता है की लोग शिक्षा संस्थान शिक्षा देने के लिए नहीं बल्कि अपना व्ययसाय चलाने के लिए खोलते है।

आजकल शहरों में तो क्या, गांवों में भी शिक्षा का व्यवसायीकरण हो गया है। यदि आंकड़ों को देखा जाए तो सरकारी स्कूलों में केवल निर्धन वर्ग के लोगों के बच्चे ही पढऩे के लिए आते है, क्योंकि निजी शिक्षा संस्थाओं के फीस के रूप में बड़ी-बड़ी रकमें वसूली जाती है, जिन्हें केवल पैसे वाले ही अदा कर पाते है। और हमारे उत्तर प्रदेश की साक्षरता दर 69।72% है जो की देश के सभी राज्यों की तुलना में इसका 29 वां स्थान है।

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किसी भी राष्ट्र का आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक विकास उस देश की शिक्षा पर निर्भर करता है। अगर राष्ट्र की शिक्षा नीति अच्छी है तो उस देश को आगे बढ़ने से कोई रोक नहीं सकता अगर राष्ट्र की शिक्षा नीति अच्छी नहीं होगी तो वहां की प्रतिभा दब कर रह जायेगी बेशक किसी भी राष्ट्र की शिक्षा नीति बेकार हो, लेकिन एक शिक्षक बेकार शिक्षा नीति को भी अच्छी शिक्षा नीति में तब्दील कर देता है। शिक्षा के अनेक आयाम हैं, जो किसी भी देश के विकास में शिक्षा के महत्व को रेखांकित करते हैं। वास्तविक रूप में ज्ञान ही शिक्षा का आशय है, ज्ञान का आकांक्षी है विद्यार्थी, और इसे उपलब्ध कराता है शिक्षक।

अगर देश में शिक्षा का व्ययसायीकरण की प्रक्रिया चलती रही तो देश की शिक्षा प्रणाली बहुत ही कमजोर हो जाएगी। देश का विकास रुक जाएगा और देश में बेरोजगारी बढ़ जाएगी।