बेरोजगारी दर में इंडिया एशिया में टॉप पर

जिस तरह पूरे विश्व में आबादी बढ़ रही है उसी तरह बढ़ती आबादी के साथ ही बेरोजगारी पूरे विश्व में एक बड़े संकट के तौर पर उभर रही है,खासकर भारत में। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार बढ़ती बेरोजगारी की दर के मामले में भारत एशिया में सबसे आगे है। वहीँ एशियाई देश थाईलैंड इस मामले में पूरी दुनिया में अंतिम पायदान पर है।रिपोर्ट में सरकारी आंकड़ों से हुए खुलासे के आधार पर बढ़ती हुई अर्थव्यवस्थाओं में भारत की स्थिति चिंताजनक है,चीन समेत कई छोटे देशों का प्रदर्शन बेहतर रहा है।

एशिया की स्थिति

देश                        बेरोजगारी दर
भारत                      8.0%
फिलीपींस                  5.6%
इंडोनेशिया                 5.5%
चीन                        4.0%
द.कोरिया                  3.6%
मलेशिया                   3.1%
जापान                     2.8%
सिंगापुर                    2.1%
थाईलैंड                     1.3%

भारत में बेरोजगारी के क्या हैं कारण 

●जनसंख्या वृद्धि- बेरोजगारी का सबसे बड़ा कारण जनसँख्या की वृद्धि है, हमारे देश की जनसंख्या वैसे भी बहुत ज्यादा है और ये दिन पर दिन और भी बढ़ती जा रही है। ज्यादा जनसंख्या यानि रोजगार की ज्यादा आवश्यकता। आंकड़ों की मानें तो हर साल 50 लाख रोजगार की जरूरत है, लेकिन इसका 10 प्रतिशत ही रोजगार उत्पन्न हो पा रहा है।बाकी प्रतिशत लोग बेरोजगार रहते हैं।

●लाचार शिक्षा व्यवस्था- हमारे देश की शिक्षा व्यवस्था बहुत ही दयनीय स्तिथि में है। शिक्षा व्यवस्था को ऐसा बना दिया गया है कि बस रटो और पास हो जाओ। इसमें रचनात्मकता की कमी है। हमारे पास व्यवसाय प्रधान शिक्षा व्यवस्था नहीं है। देश की शिक्षा व्यवस्था ऐसी है की आज देश में सिर्फ मजदूर ही पैदा हो रहे हैं क्यूंकि लोग सिर्फ डिग्री लेकर बैठे है उनके पास हुनर की कमी है।

●लघु और कुटीर उद्योगों का समाप्त होना- भारत में कभी कुटीर उद्योगों का एक तंत्र था लेकिन अग्रेजी हुकूमत और उसके बाद देश की सरकारी नीतियों ने उसे धीरे-धीरे विलुप्त कर दिया। इसकी वजह से भी बेरोजगारी की समस्या उत्पन्न हुई।क्यूंकि पहले लोगों के अपने खुद के लघु उद्योग होते थे और उनको किसी के पास रोजगार के लिए जाना नहीं पड़ता था।

●यंत्रीकरण- आज इंसानों से ज्यादा मशीनों पर भरोसा किया जा रहा है। पहले जिस काम को करने के लिए 10 लोगों की आवश्यकता होती थी, आज उस काम को एक मशीन कर दे रही है।और अगर मशीनों पर काम करने के लिए मिलता है तो देश के लोगों के पास हुनर नहीं है की वो मशीनों पर काम कर सकें। इस कारण से भी बेरोजगारी बढ़ रही है।

●पारम्परिक व्यवसायों में अरुचि- आज की युवा पीढ़ी अपने पारंपरिक व्यवसायों को करने में शर्म महसूस करती है। जैसे किसान का बेटा खेती नहीं करना चाहता। वो शहर जाकर थोड़े से पैसों में मजदूरी करने के लिए तैयार है, लेकिन गांव में रहकर खेती नहीं करना चाहता।इसी तरह आज का युवा अपने पूर्वजों के पारम्परिक धंधों में रूचि नहीं रखता है।

●देश का डिजिटलाइजेशन- आज देश की सरकार पूरे देश को डिजिटल बनाने में लगी है लेकिन देश के अधिकतम लोगों को इसके बारे में पता ही नहीं है की इसमें काम कैसे करना है उन्हें इसका प्रशिक्षण नहीं दिया जाता है जिससे वो काम को सीख नहीं पाते हैं और डिजिटल कामो को करने में असमर्थ हो जाते हैं जिसके कारण बेरोजगारी बढ़ती है।

व्यवसायिक जीवन और सरकारी कर्मचारी जीवन में जाने फर्क

बेरोजगारी कम करने के उपाय

समस्याओं का समाधान उनके कारणों में ही छिपा रहता है अगर हम उन्ही कारणों पर ध्यान देकर उन्हें सुधारने की कोशिश करे तो हमारी समस्याएं अपने आप कम हो जाएंगी। जैसे-

●जनसंख्या वृद्धि पर रोक- आज जनसंख्या देश में बेरोजगारी का एक बड़ा कारण है अगर हम तेजी से बढ़ती जनसंख्या पर रोक लगा दे तो जनसंख्या में कमी आ जाएगी और जब जनसंख्या में कमी होगी तो बेरोजगारी अपने आप ही कम हो जाएगी।

●शिक्षा में सुधार- हमारे देश में बेरोजगारी का एक कारण शिक्षा की लाचार व्यवस्था भी है,अगर सरकार देश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार कर दे,शिक्षा को रचनात्मक बनाये और व्यावसायिक अध्ययनों पर विशेष ध्यान दे जिससे बेरोजगारी कम होगी।

●लघु और कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देकर- अगर सरकार देश के ग्रामीण क्षेत्रों में लघु उद्योगों को बढ़ावा देगी तो गाँव के लोग रोजगार के लिए शहर की तरफ नहीं भागेंगे वो अपने गाँव में ही जीवन यापन कर लेंगे।

●यंत्रीकरण में प्रशिक्षण- आज देश में यंत्रीकरण का दौर है जिसमे लोगो को काम करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है,और बहुत से लोग इसको समझ ही नहीं पाते हैं।अगर सरकार लोगों को इसका प्रशिक्षण दे जिससे उनको पता चले की मशीनों पर काम कैसे करना है। सीखने के बाद वे कहीं भी आसानी से काम कर सकते हैं।

●पारम्परिक व्यवसायों को महत्व- देश की युवा पीढ़ी अपने पारम्परिक व्यवसायों को करने में शर्म महसूस करती है वो बेरोजगार रहेंगे लेकिन अपना पारम्परिक व्यवसाय नहीं करते हैं। अगर ये लोग अपने पारम्परिक व्यवसायों को महत्व दे तो बेरोजगार नहीं रहेंगे। इस तरह हम बेरोजगारी के कारणों को ही सुधार कर बेरोजगारी को कम कर सकते हैं।