समाज सेवी नानाजी, पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी और संगीतकार भूपेन हज़ारिका भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से होंगे सम्मानित

नानाजी देशमुख व भूपेन हज़ारिका को मरणोपरांत व पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी कोराष्ट्रपति भवन में सम्मानित किया जायेगा। सरकार ने गड्तंत्र दिवस की संध्या पर तीनो हस्तीओ को भारत रत्न देने की घोषणा की।   

भारत रत्न सम्मान भारत का सबसे बड़ा नागरिक सम्मान हैं।  ये सम्मान राष्ट्रीय सेवा करने वालो को दिया जाता है। इन सेवाओं में खेल,साहित्य,विज्ञानं,कला और सार्वजनिक सेवा आते है। यह रत्न एक वर्ष में तीन लोगो को दिया जा सकता हैं। यह उन लोगो को रत्न मरणोपरांत भी दिया जाता है जो हमारे देश के लिए कुछ कर जाते है। 

मोदी ने किया ट्वीट

“प्रणब दा हमारे समय के एक गजब के स्टेट्समैन रहे हैं। उन्होंने दशकों तक बिना थके और बिना किसी स्वार्थ के देश की सेवा की। देश के विकास में उन्होंने अपनी मजबूत छाप छोड़ी। उन्हें भारत रत्न दिए जाने की घोषणा से बहुत खुश हूं।” “भूपेन हजारिका का संगीत और गीतों को कई पीढ़ियों के लोग सुनते आ रहे हैं। उन्होंने भारत की संगीत परंपरा को पूरी दुनिया में फैलाया।”

मोदी सरकार का कड़ा फैसला, 15 आयकर अफसर किये गए सेवानिवृत्त

पूर्व राष्ट्रपति माननीय प्रणव मुखर्जी

इनका जन्म 11 दिसंबर 1935 में कोलकाता के छोटे से गॉव मराठी जिला बीरभूम में हुआ था। ये एक ब्राम्हण परिवार से थे। प्रणव मुखर्जी कांग्रेस के बहोत जाने माने नेता रहे है। राष्ट्रपति बनने से पहले ये देश के कई उच्च पदों को संभालने में समर्थ रहे है। जिनमे से वित्त मंत्रालय सहित कई अहम पद थे। इन्हे अपनी पार्टी का संकटमोचनं भी कहा जाता था। इन्होने कांग्रेस की तीन पीढ़ियों के साथ काम किया। सन 1980-1985 के दौरान प्रधानमंत्री की अनुपस्थति में उन्हें केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बैठको की अध्यछता की थी। पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी को 2008 में पदम विभूषण से सम्मानित किया गया था। प्रणव मुखर्जी 2012 से  2017 तक राष्ट्रपति का कार्यभार संभाला तथा राष्ट्रपति के पद से हटने के बाद भी कई मामलो में ये अपनी राय देते रहे।

नानाजी  देशमुख

नानाजी को जनसंघ के स्थापको के रूप में याद किया जाता है। जनता पार्टी ने 1997 में अपनी सर्कार बनायीं तो नानाजी को मोरारजी-मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था। उन्होंने इसे ये कहकर ठुकरा दिया की “60 वर्ष से अधिक के लोग सरकार से बाहर रहकर कार्य करे।” वे हमारे लिए आदर्श की स्थापना कर गए। नानाजी का जन्म महाराष्ट्र के कस्बे काडोलो जिला हिंगोली में हुआ। ये ब्राम्हण परिवार से थे। नानाजी ने 95 वर्ष में चित्रकूट स्थित भारत के पहले ग्रामीण विश्विद्यालय जिसकी स्थापना उन्होंने खुद की थी वहां पर उन्होंने अंतिम साँस ली थी। 

भूपेन हज़ारिका

भूपेन हज़ारिका असम राज्य के गीतकार, संगीतकार और गायक थे। साथ ही साथ असम भाषा के कवि, फिल्म निर्माता, लेखक और असम संस्कृति और संगीत के अच्छे जानकर भी थे। हज़ारिका का जन्म असम जिला तिनसुकिया के सादिया में हुआ था।  ये अपने गीत खुद लिखते थे। 2011 में इन्हे पद्मभूषण से सम्मानित किया गया।