मिल्खा सिंह आज मनाएंगे अपना 90 वां जन्मदिन

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भारत को पूरे विश्व में पहचान दिलाने वाले धावक मिल्खा सिंह आज 20 नवम्बर दिन बुधवार को अपना 90 वां जन्मदिन मनाएंगे। आपको बता दें की भारत के सबसे प्रसिद्ध तथा सबसे ज्यादा सम्मान पाने वाले और भारत को दौड़ के क्षेत्र में पूरे विश्व में ख्याति दिलाने वाले धावक मिल्खा सिंह का जन्म 20 नवम्बर 1929 को अविभाजित भारत के पंजाब में हुआ था। भारत विभाजन के बाद मिल्खा सिंह का परिवार पकिस्तान के हिस्से में चला गया और विभाजन के कारण हुए दंगों में मिल्खा सिंह ने अपने माता-पिता तथा बड़े भाई-बहनो को खो दिया और अपने आपको बचाने के लिए मिल्खा सिंह पकिस्तान से भारत वापस आ गए।

मिल्खा सिंह सेना में हुए भर्ती

मिल्खा सिंह अपने भाई के कहने पर सेना में जाने का फैसला किया, आपको बता दे की मिल्खा सिंह ने सेना में भर्ती होने का सपना चौथी बार में पूरा कर पाए थे, तीन बार मिल्खा सिंह पूरी तरह असफल रहे लेकिन मिल्खा सिंह ने हार नहीं मानी कहते है कोशिश करने वालों की हार नहीं होती है, इस बात को मिल्खा सिंह ने सच साबित कर दिखाया और चौथी बार में मिल्खा सिंह को भारतीय सेना के रूप में चुन लिया गया। मिल्खा सिंह सेना में क्रास कंट्री रेस में छठे स्थान पर आये यह देखकर भारतीय सेना ने मिल्खा सिंह को खेल-कूद के लिए स्पेशल ट्रेनिंग करना शुरू करवा दिया।

मिल्खा सिंह को क्यों मानते है सबसे सम्मानित धावक

मिल्खा सिंह को भारत का सबसे सम्मानित तथा सबसे प्रसिद्ध धावक माना जाता है क्योंकि मिल्खा सिंह भारत को राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक दिलाने वाले सबसे पहले धावक हैं। आपको बता दें की मिल्खा सिंह देश के सबसे ज्यादा मेडल जीतने वाले धावक है। मिल्खा सिंह ने 1958 में एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीता, 1958 में ही मिल्खा सिंह ने राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीता और 1962 में एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीता। इतना ही नहीं मिल्खा सिंह ने कई अन्य खेलों में स्वर्ण पदक जीते। मिल्खा सिंह ने भारत का परचम पूरे विश्व में लहरा दिया है। मिल्खा सिंह को भारत के चौथे सबसे सर्वश्रेष्ठ सम्मान पद्म श्री से सम्मानित किया गया है।

आज भी इस गलती का पछतावा करते हैं मिल्खा सिंह

आपको बता दें की भारत के सबसे ज्यादा प्रसिद्ध तथा सम्मानित धावक मिल्खा सिंह का एक सपना अधूरा है और इस अधूरे सपने को सोच कर उनको बहुत पछतावा होता है। मिल्खा सिंह ओलम्पिक खेलों में भी भारत का परचम लहराने गए थे लेकिन उनकी एक छोटी से गलती की वजह से उनका सपना अधूरा रह गया। मिल्खा सिंह रोम ओलम्पिक खेल शुरू होने से पहले कई बड़े-बड़े खेलों में परचम लहराया था। सबको विश्वास था की मिल्खा रोम ओलम्पिक में भारत के लिए स्वर्ण पदक जरूर जीतेंगे। रोम ओलम्पिक में दौड़ शुरू होने के बाद आधे समय तक मिल्खा सिंह सबसे आगे थे लेकिन उनको लगा की इस रफ़्तार से हम आख़री तक नहीं दौड़ पाएंगे। इसी जगह मिल्खा ने गलती ये किया की मिल्खा पीछे मुड़कर अपने प्रतिस्पर्धियों को देखने लगे। मिल्खा ओलम्पिक में बने रिकार्ड को ध्वस्त करके ऐसा कीर्तिमान बनाया की वह 40 साल बाद जाकर टूटा लेकिन इस गलती से स्वर्ण पदक का सपना देखने वाले मिल्खा सिंह रोम ओलम्पिक में कांस्य पदक भी नहीं हासिल कर सके। इसी गलती से मिल्खा सिंह का सपना अधूरा रह गया।

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मिल्खा सिंह के जीवन के रोचक तथ्य

  • मिल्खा सिंह बचपन में 10 किलो मीटर की दूरी स्कूल दौड़ कर जाते थे
  • मिल्खा सिंह के द्वारा बनाया गया रिकार्ड 40 साल बाद टूटा
  • मिल्खा सिंह ने अपने सभी सम्मान देश के नाम कर दिया
  • मिल्खा सिंह भारत के सबसे ज्यादा मेडल जीतने वाले धावक है