अयोध्या मामले में अरशद मदनी को सुप्रीम कोर्ट का फैसला मंज़ूर

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  • सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले जमीयत-उलेमा-ए-हिन्द के अध्यक्ष और मौलाना अरशद मदनी का बयान
  • बाबरी मस्जिद, कानून और न्याय की दृष्टि में एक मस्जिद थी: मौलाना अरशद मदनी

अयोध्या में राममंदिर तथा बाबरी मस्जिद के मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट का फैसला कुछ ही दिनों में आने वाला है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले कई नेताओं, अधिकारियों और मौलानाओं के बयान आ चुके हैं। जमीयत-उलेमा-ए-हिन्द के अध्यक्ष और मौलाना अरशद मदनी ने भी बयान जारी करते हुए कहा है कि “सुप्रीम कोर्ट का जो फैसले होगा उसे हम स्वीकार करेंगे। सुप्रीम कोर्ट के लिए हमारे दिल में बहुत सम्मान हैं और हम इसके हर फैसले का सम्मान करेंगे”। साथ ही उन्होंने कहा कि “बाबरी मस्जिद, कानून और न्याय की दृष्टि में एक मस्जिद थी। करीब 400 साल तक मस्जिद थी, इसलिए शरीयत के लिहाज आज भी वो एक मस्जिद है”।

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जमीयत के प्रमुख मौलाना अरशद मदनी ने बयान देते हुए कहा कि “अयोध्या मामला महज भूमि विवाद का मामला नहीं है बल्कि कानून की प्रधानता की परीक्षा का मामला है”। उन्होंने आगे कहा कि “मस्जिद को लेकर मुसलमानों का मामला पूरी तरह से ऐतिहासिक तथ्यों और इस साक्ष्य पर आधारित है कि बाबरी मस्जिद का निर्माण किसी मंदिर या किसी उपासना स्थल को तोड़ कर नहीं कराया गया था”।