इस दिवाली पर पटाखे फोड़ना पड़ेगा महंगा, लगेगा 10 करोड़ रुपये का जुर्माना

जैसा की आप सब जानते है की दिवाली का त्योहार आने वाला है। सभी लोग दिवाली की तैयारियों में जुटे हुए है। मार्केट में भी त्योहार को लेकर चहल पहल नजर आ रही है। सभी को दीवाले के त्योहार का बड़ी बेसब्री के साथ इंतजार है। लेकिन इस त्योहार में अगर आप हर बार की तरह इस बार भी पटाखे फोड़ने की प्लानिंग कर रहे हैं। तो इस प्लानिंग को केंसिल कर दीजिये क्योकि इस बार आपको बिना पटाखों के दिवाली माननी पड़ेगी। यदि आपने पटाखे फोड़े तो आपको जेल की हवा खानी पड़ेगी और इतना ही नहीं आपको जेब भी ढीली करनी पड़ेगी। इसलिए आने वाले त्योहार के पहले ही आप सावधान हो जाइये।

प्रदूषण नियंत्रण के लिए एनजीटी किया गया गठन 

इस बार सुप्रीम कोर्ट ने फैसला किया है की पर्यावरण संरक्षण कानून के तहत प्रदूषण फैलाने वाले को पांच से सात साल तक की जेल की सजा दी जाएगी। साथ ही ऐसे व्यक्ति पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है। बता दे की सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के उपाध्यक्ष जितेंद्र मोहन शर्मा और एडवोकेट कालिका प्रसाद का कहना है कि हवा को प्रदूषित होने से रोकने के लिए कुछ नियम बनाये गए है। जिसमे पर्यावरण संरक्षण अधिनियम और वायु प्रदूषण नियंत्रण नियम बनाए गए हैं। साथ ही उन्होंने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, सभी राज्यों में राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और एनजीटी का गठन किया गया है। इनको सुप्रीम कोर्ट ने वायु प्रदूषण रोकने के लिए आदेश देने और उसके खिलाफ सख्त कार्यवाही करने का अधिकार दिया है।

दिवाली पर पटाखों को लेकर जारी की गई गाइडलाइन

पटाखे फोड़ने पर हो सकती है जेल

कालिका प्रसाद काला ने बताया कि एनजीटी को प्रदूषण फैलाने वाले व्यक्ति को तीन साल तक की सजा सुनाने और उस पर 10 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाने का अधिकार है। उन्होंने कहा यदि 10 करोड़ रुपये के जुर्माने और जेल की सजा होने पर भी प्रदूषण लगातार जारी रहता है। या नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश का पालन नहीं किया गया। तो सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल को जब तक आदेश का पालन न हो तब तक के लिए प्रतिदिन के हिसाब से 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाने का आदेश दिया है।

प्रदुषण फैलाने वाली कपनियों पर होगा 25 करोड़ का जुर्माना

कलिका प्रसाद ने कहा है की यदि कोई कंपनी प्रदुषण फैलती है तो नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल उस कंपनी पर 25 करोड़ रुपये तक जुर्माना लगा सकता है। उन्होंने कहा की अगर इस जुर्माने को भरने के बाद भी कंपनी प्रदूषण करना काम नहीं करती तो। उस कंपनी पर प्रतिदिन हिसाब से एक लाख रुपये का जुर्माना लगाने का आदेश दिया है।

वायु को प्रदूषित करने का किसी को अधिकार नहीं, जितेंद्र मोहन शर्मा

जितेंद्र मोहन शर्मा ने कहा की स्वच्छ वायु हमारे जीवन से जुड़ी हुई है। इसलिए किसी को भी वायु प्रदूषित करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा की जिस तरह हम लोगो को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन जीने के मौलिक अधिकार मिले है उसी तरह स्वच्छ हवा पाने का अधिकार भी हमारा है। सीनियर एडवोकेटजीतेन्द्र मोहन शर्मा ने यह बात बिल्कुल साफ तौर पर बताते हुए कहा की सुप्रीम कोर्ट भी अपने फैसले में यह बात साफ कर चुका है।